मंगलवार, 13 अगस्त 2019

नीलकंठ : पराजय का विष और शिव

नीलकंठ : पराजय का विष और शिव-

           भारतीय संस्कृति के जिज्ञासुओं को संजय त्रिपाठी की पुस्तक 'नीलकंठ' जरुर पढ़ी चाहिए.


विशाल पौराणिक कथा महासागर से संचित भारतीय सांस्कृतिक साहित्य को कई उदीयमान लेखकों द्वारा औपन्यासिक लेखन में परिवर्तित करने का प्रयास चल निकला है। इस सिलसिले में कई लेखकों की पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। वर्तमान में मध्य प्रदेश में लोकसेवक के पद पर सेवारत संजय त्रिपाठी ने भी इस क्षेत्र में सफल लेखन किया है। यह पुस्तक लेखक ने अपनी पत्नी मंजुल त्रिपाठी के सहयोग से लिखी है।

'मेरा राम मेरा देश' और 'मथुरा ईश' की सफलता के बाद संजय त्रिपाठी की यह तीसरी
किताब है।

 संजय त्रिपाठी की पुस्तक 'नीलकंठ : पराजय का विष और शिव'  यह पौराणिक इतिहास पर हिन्दुओं के त्रिदेवों में सबसे अधिक लोकप्रिय 'महादेव' अर्थात् शिवजी की महानता पर लिखा उपन्यास है। लेखक ने बहुत ही कलात्मक लेखन शैली के जरिये इस उपन्यास में आर्य-द्रविड़ तथा देवासुर संघर्ष की क​थाओं को जोड़कर भारतीय सांस्कृतिक एकता में भगवान शिव की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला है जिसमें उन्होंने काल्पनिक वार्तालाप को सजीवता के साथ मौलिक कलेवर में पेश करने का सफल प्रयास किया है।



आर्यों और द्रविड़ों के बीच अस्तित्व की लड़ाई में आर्यों का नेतृत्व उनके युवा नायक विष्णु कर रहे थे तो द्रविड़ों की ओर से शिव के हाथ कमान थी। युद्ध लंबा चला जिसमें आखिरकार आर्यों की जीत हुई.




संजय त्रिपाठी की यह पुस्तक बेहद रोचक है। भारतीय संस्कृति के जिज्ञासुओं को यह पुस्तक जरुर पढ़ी चाहिए।

संजय ​त्रिपाठी से अन्य किताबों की समीक्षाएं :
मेरा राम मेरा देश : राम की गाथा के बीच भारतीय इतिहास-  https://amzn.to/2Z4ixSl


">मथुरा ईश : कृष्ण को नर से नारायण बनाने की कहानी- https://amzn.to/31xHgMz


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सोमवार, 12 अगस्त 2019

🔸 नियति का निर्माण 🔹 विटामिन ज़िन्दगी 🔸 मल्हार 🔹 लौंडे शेर होते हैं



🔹 लौंडे शेर होते है


                                                      लेखक : कुशल सिंह      

                                      प्रकाशक : एका/हिन्द युग्म     

                                              पृष्ठ : 160                

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🔹 विटामिन ज़िन्दगी




लेखक : ललित कुमार

प्रकाशक : एका/हिन्द युग्म

पृष्ठ : 256

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🔸 मल्हार



लेखक : विवेक कुमार

प्रकाशक : हिन्द युग्म

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🔸 नियति का निर्माण








लेखक : कमलेश पटेल

प्रकाशक : एका (वैस्टलैंड बुक्स)

पृष्ठ : 206

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सोमवार, 5 अगस्त 2019

सेपियन्स : मानव-जाति का संक्षिप्त इतिहास

सेपियन्स : मानव-जाति का संक्षिप्त इतिहास

लोग आसानी से समझ लेते हैं कि ‘आदिवासी’ भूतों प्रेतों और आत्माओं में विश्वास करते हुए और हर पूर्णिमा की रात को अलाव के चारों ओर सामूहिक रूप से नाचते हुए अपनी सामाजिक व्यवस्था को पुख्ता करते हैं। जो चीज़ हम नहीं समझ पाते, वह यह है कि हमारी आधुनिक संस्थाएँ भी ठीक ऐसे ही आधारों पर काम करती हैं। उदाहरण के लिए व्यावसायिक कॉर्पोरेशनों की दुनिया को ही लें। व्यापार से जुड़े आधुनिक लोग और वकील शक्तिशाली ओझा हैं। उनमें और आदिवासी ओझाओं में प्रमुख अन्तर यह है कि आधुनिक वकील विचित्रतम किस्से सुनाते हैं। प्यूज़ो की किंवदन्ती हमें एक अच्छा उदाहरण उपलब्ध कराती है। ~युवाल नोआ हरारी
(सेपियन्स : मानव-जाति का संक्षिप्त इतिहास)
Hindi Translation of the International bestseller 'Sapiens'.

                              

                          

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शनिवार, 3 अगस्त 2019

एमबीए किया बिना सीखें बिज़नेस के हुनर

एमबीए किया बिना सीखें बिज़नेस के हुनर
         







'हर व्यक्ति के मन में ये निराधार डर होते हैं और इन्हें तेज़ी से बाहर निकाला जा सकता है। इसके लिए आपको सिर्फ कुछ सरल अवधारणायें सीखनी होती हैं, जो आपका दृष्टिकोण बदल देंगी और आपको सिखा देंगी कि व्यवसाय सचमुच कैसे काम करता है। एक बार जब आप अपने डरों को जीत लेते हैं, तो आप संसार में कुछ भी हासिल कर सकते हैं।' स्वतंत्र व्यावसायिक सलाहकार जॉश कॉफ़मैन का यह कथन बहुत कुछ बता देता है। उनकी पुस्तक 'एमबीए किए बिना सीखें बिज़नेस के हुनर' में व्यवसाय करने के बारे में जिस तरीके से बताया गया है, वह बेहद कारगर है और किताब दावा करती है कि इसे पढ़कर बिना किसी व्यावसायिक शिक्षा के,  बिज़नेस में बेहतर परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं। यह पुस्तक 'द पर्सनल एमबीए' का हिन्दी अनुवाद है। पुस्तक का प्रकाशन मंजुल पब्लिशिंग हाउस ने किया है। अनुवाद डॉ. सुधीर दीक्षित द्वारा किया गया है।

लेखक जॉश कॉफ़मैन एक जरुरी बात कहते हैं कि हमें हर चीज़ को जानने की आवश्यकता नहीं है। यदि हम केवल कुछ अति महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझ लेते हैं तो वह बेहतर है। जब कार्य करने लिए बुनियादी सिद्धांतों का ढांचा तैयार हो जाता है, तो ज्ञान को बढ़ाना और प्रगति करना ज्यादा सरल होता है।

जॉश कॉफ़मैन ने बिज़नेस स्कूलों के विकल्प के रूप में पर्सनल एमबीए बनाया है। उनकी वेबसाइट ने लाखों पाठकों को सर्वश्रेष्ठ व्यावसायिक अवधारणाओं की जानकारी दी है। अब कॉफ़मैन सारी अनिवार्य तथा बुनियादी बातें इस पुस्तक में प्रस्तुत कर रहे हैं।


"यह पुस्तक बुनियादी व्यावासयिक अवधारणाओं का ऐसा समूह है, जिसका इस्तेमाल करके आप बहुत कुछ कर सकते हैं। यह पुस्तक पढ़ने से आपको व्यवसाय-संबंधी ज्ञान की दृढ़ नींव मिल जाएगी, जिसका इस्तेमाल करके आप सफल हो सकते हैं। जब आप बुनियादी बातों में माहिर हो जाते हैं, तो इसके बाद आप सबसे चुनौतीपूर्ण लक्ष्य भी आश्चर्यजनक आसानी से हासिल कर सकते हैं।"





व्यवसाय करना सिखाने वाली इस किताब के पहले अध्यायों में व्यवसाय करने के तरीके और अपने परिणामों को बेहतर बनाने पर लेखक ने चर्चा की है। उसके बाद मनोविज्ञान की मुख्य अवधारणाओं पर लिखा गया है। बताया गया है कि किस तरह लोग अच्छी तरह से कार्य करने में दक्षता प्राप्त कर सकते हैं। प्रबंधन और नेतृत्व की बुनियादी बातों पर भी जॉश कॉफ़मैन ने विस्तार से चर्चा की है। यह पुस्तक पाठकों को प्रेरित करती है कि बेहतर तरीके से व्यवसाय करना उतना मुश्किल नहीं है। सिर्फ सही सोच और योजना से चीज़ों को एक जगह लाया जा सकता है।

''संसार के सबसे दौलतमंद आदमियों में से एक के पास भी सुधार करने के लिए चीज़ें हैं और टटोलने के लिए बहुत कुछ है। सतत उत्सकुता ही वह चीज़ है, जिसने उन्हें सफल बनाया है।''





''संसार के सबसे दौलतमंद आदमियों में से एक के पास भी सुधार करने के लिए चीज़ें हैं और टटोलने के लिए बहुत कुछ है। सतत उत्सकुता ही वह चीज़ है, जिसने उन्हें सफल बनाया है।''


                        एमबीए किया बिना सीखें बिज़नेस के हुनर
                                      लेखक : जॉश कॉफ़मैन
                                   अनुवाद : डॉ. सुधीर दीक्षित
                                             पृष्ठ : 404
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डेल कारनेगी के जीवन को महान बनाने के आसान तरीके -

डेल कारनेगी के जीवन को महान बनाने के आसान तरीके -

                      
                        

आप डेल कारनेगी के बताए सिद्धांत सीखेंगे जिन्हें लाखों लोगों ने आज़माया है, ताकि आप यह जान सकें कि जीवन में जो परिस्थितियां आती हैं, उनका सामना कैसे किया जाए। यह भी सीखेंगे कि अपनी शक्तियों व कमज़ोरियों का पता कैसे लगाया जाए और उन्हें किस तरह बढ़ाया जाए।

यह पुस्तक हमें जीवन को महान बनाने के कारगर तरीके बतायेगी। जीवन को समृद्ध करने के सिद्धांतों पर रोशनी डालेगी कि परिवार, नौकरी, सामाजिक गतिविधियों के बीच संतुलन किस तरह बनाएं, तनाव व चिंता को कम ​कैसे करें, स्वस्थ जीवनशैली को किस तरह विकसित किया जाए, प्रभावशाली व्यक्तित्व किस तरह बनाएं, अपनी भावनाओं को नियंत्रित कैसे करें।

पुस्तक के पहले अध्याय 'महान जीवन व्यक्तिगत स्वप्न से शुरु होता है' में डेल कारनेगी ने कहा है कि स्वप्न हमारे कार्यों को अर्थपूर्ण बनाते हैं। यह हमारी शक्तियों, मूल्यों, विश्वासों को मजबूती प्रदान करता है। उन्होंने स्वप्न और मिशन को वास्तविकता में परिवर्तित करने के लिए चार मुख्य सिढ़ियां बतायी हैं, जिन्हें पाठक पुस्तक में पढ़ेंगे।


"लक्ष्य को निर्धारित करने से पहले खूब सोच-विचार की जरुरत है। स्व-सुधार के निश्चित लक्ष्य तय करने पर विशेष जोर दिया जाना आवश्यक है। इसकी वजह यह है कि ऐसा करने से हम अपने लक्ष्य ज्यादा तेजी और कम प्रयास से प्राप्त कर सकते हैं।"

                                                 
 



कारनेगी ने महान जीवन जीने के लिए अपने सर्वोच्च मूल्यों के मुताबिक जीने की सलाह दी है। वे हमें नैतिकता का स्व-आकलन करने को कहते हैं। वे कहते हैं कि हमारी नैतिक संहिता जीवन के लिए जमीनी नियम तय कर देती है, जो बेहद जरुरी है। उस विक्ल्प को चुनने की उन्होंने सलाह दी ​है जो हमारे लिए सबसे ज़्यादा हितकारी होगा। उसी तरह कठोर निर्णय लेने के लिए उन विकल्पों को खत्म कर दें जिनका नैतिक मूल्य ही नहीं है। उसके बाद बचे हुए सबसे नैतिक विकल्प को चुनें। ऐसा करने से निर्णय लेना आसान होगा और हम बेहतर करने की अपनी क्षमता को विकसित कर सकते हैं।

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